सोरठ

सोरठ

५३६ दिन अगाडि

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११ माघ २०७९

माघ टु लौव बरस हुइटो 

माघ टु लौव बरस हुइटो 

५४७ दिन अगाडि

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२९ पुष २०७९

                                             मानबहादुर चौधरी “पन्ना” माघ टु लौव बरस हुइटो  माघ टु मुक्तिक दिवस हुइटो  माघ टु सद्भावके प्रतिक हुइटो  माघ टु मेलमिलापके प्रतिक हुइटो । हरेक साल सबजन माघ मनैठ हरेक साल टुुहार नाउँम महोत्सव कर्ठ  हरेक साल टुहार नाउँम नाच, नौटङ्की कर्ठ  हरेक साल लर्कासे बुह्राइलसम लौव लुगा घल्ठ  तर, लौव जोश जाँगर हुइल ठर्या नि डेख्ठु लौव उमङ्ग उत्साह ब्वाकल बठिन्या नि डेख्ठु टुहिन लौव बरसम लौव उमङ्ग डिह नि स्याक ठुइट  मुक्ति दिवसके दिन फेन  हमार निर्डोेस डाडुभैया बन्दी बनल बनल बाट सद्भाव सहिष्णुताके रटान सरकार कर्टि रहठ  खै का कारनले सरकार हमन कर्या नजरले हेर्टि रहठ हमार हक अधिकारप्रति सद्भाव नि डेख्ठु  एक्क देशक नागरिकम फेन समानता नि डेख्ठु  हरेक बरस माघ महोत्सव मनैलक,  गीत गैलक फगट फगट डेख्ठु । ओह मार, जाट्टिक मुक्तिक डगर खोज्डेउ टु समानता, सद्भावके डगर खोज्डेउ टु थारुन दासताके नजरसे केल हेर्ठ  हमार हक अधिकारके सहर खोज्डेउ टु माघ टुहार नाउँम कत्रा मनै दुखके गीत फे गैठ माघ टुहार नाउँम कत्रा मनै खुशीक गीत फे गैठ माघ टुहार नाउँम कत्रा मनै मुक्तिक गीत फे गैठ माघ टुहार नाउँम रहरके गीत फै गैठ ।  तर,  टुहार सुग्घर गीतम फे  आधुनिकताके अश्लिल फुलकुमारी केल डेख्ठु  शब्दक अर्ठ नि बुझ्ना डिजेक ढ्वाङ्ग केल डेख्ठु  मदहोस हुइल ठर्या बठिन्न्के स्वाङ्ग केल डेख्ठु महि दुख लागठ,  म्वार पुस्ता माघमसे का सिखट ? भर्खरिक भैयाबाबु हुक्र संस्कृतिसे का सिखट ? म्वार बुडि, बुबा, नट्या, नटिनेन् का सिखाइट ? खै कहाँ कमजोरी हुइटा ? आज म्वार संस्कृति रुइटा आधुनिकताके फरिया पेहर्ख घिनलग्टिक हुइटा । काखर कि, माघ टुहार गीत मृदङ्ग ट हमार पहिचान हो  माघ टुहार नाच ट हमार चिन्हारी हो  हमार पुर्खनके सैडान हो  ओहमार माघ,  अर्जि लगाइटु, बर्जि लगाइटु  सक्कु युवा पुस्ता हुकहन गाउँबस्तीक गोची गोचा हुकहन आधुनिकताम रमैटि रलक फुलकुमारी हुकहन  सबजहन लौव जोश ओ जाँगर डेउ गीतबासके सुग्घर मागर डेउ ठुन्यार भावना ओ लौव उमङ्ग डेउ आफन हक अधिकारके लाग लर सेक्ना जङ्ग डेउ  हे मोर डाइ बाबा हे मोर बुडि बुबा हे मोर काकी काका आफन पुस्तन  असल संस्कार ओ ढङ्ग डेउ छत्रि असक जोढा विर बिरङ्गनके सङ्ग डेउ ।                                     वीनपा–२, सुर्खेत 

डेरा ओ देउता

डेरा ओ देउता

५८८ दिन अगाडि

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१७ मंसिर २०७९

                                                                                                                                                        हमार पहुरा  पहिले  जब जब मै निक्रुँ कोनो यात्रामे अचानक डगरेमका मन्दिरके साम्ने हाँठ डुवा करक लग उठे हे देउता, मोर आजुक यात्रा सफल करहो ।  मै सहरमे बैठ्ठुँ ओहेसे यहाँ, ठरवाना, मरवा कहुँ नै भेटैलुँ सोच्लुँ महि रक्षा करुइया देउता जब नै हुइट इ सहरमे  मै कसिक सुरक्षित रहम् ? मोर मेनम  प्रश्नके भुइँचाल उठल का सहरमे फेन मरुवा स्ठापना करे नै सेक्जाइ ? डेरा जिन्दगीमे मरुवाके स्ठापना ? इ डुरके बात हो इ केवल सपना हो पूरा नै हुइना सपना टै छोरडे ।  मने तुरुन्त समस्यक् समाढान भेटाके मै डंग पर्ठु सायड गुर्बावा मोर मनेम  पैंठके कहलाँ  अपन डेरक् एक कोन्वम डेहुरार काजे नै बनैठे ? हजुर,  आजकाल, मै अपन डेरक् एक कोन्वाहे डेहुरार मान्ले बटुँ आब जब जब निकरठुँ मै यात्रामे डेरक डेहुरार मानल कोन्वा ओर झुक्के डुवा मंगठुँ अई गुर्वावा, मोर आजुक यात्रा सफल करहो । सहरिया बाबु लोग पशुपति, गुहेश्वरीक् चक्कर कट्नासे का अपनेन्के मोर पद्चिन्ह पछ्यइयक नै चहबि ? आई डेरक् एक कोन्वा ओर डेहुरार बनाई ।  डेहुरार बनाई ।।                                                                                                                                                       गोचाली खबर (विद्युतकर्मी साहित्यिक समाजद्वारा काठमाडौंमा शुक्रबार आयोजित बहुभाषिक काव्य गोष्ठीमा वाचित कविता । डेराको साँगुरो कोठामा बसे पनि देउताप्रति आस्था जगाउने एउटा कुना छुट्याउनुपर्ने भाव कविताले बोकेको छ।)

लाल आयोग प्रतिवेदन काहे गुपचुप ?

लाल आयोग प्रतिवेदन काहे गुपचुप ?

५९५ दिन अगाडि

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१० मंसिर २०७९

मोती रत्न   का हाे यी लाल आयोग प्रतिवेदन ? बटाई सँघारी- यी खुनसे रङ्गल बा, टबे साइट, यिही लाल प्रतिवेदन कठ। नै ! गाेचाली। बिलकुल अत्रे किल नै ! शान्तिपूर्ण आन्दोलनमे घुस पैठ व ज्यादतीक सच बात हाे। १८ महिनक बँच्चक चित्कार हाे, निर्दाेषके बाेल हाे, करिया चद्रीले छाेपल सच हाे, सरकारी गाेलीक काला पाेल हाे, गिरिशचन्द्र लालके यी बाेल हाे। १४ महिना लागल, ७ सय ९ पेजके गद्दारीकके झाेल हाे। शेरके बिरुद्धमे बाेलल यी सच बाेल हाे। सचहे नुकाके झुठ सरकारके यी राेल हाे। टबेमारे  आजसम  गुपचुप बा, अभिन अध्ययन हुइटी बा, गृहके अध्ययन, प्रधानमन्त्रीक कार्यालयक अध्ययन, महि लागट ७ सय पेज अध्ययन कर्ना ७ बरस लाग गिल काहुँ ? अभिन अध्ययन हुइटा, अभिन ९ पेज बाँकी बा ? असिक पह्रलेसे  काेई आज डा.के उपाधि पा डारठ काहुँ ? कृपया स्पष्ट करदेउ, काैन सरकार अट्रा अध्ययन करले बा, टीकापुरबासी उहिह डा.के उपाधि डेहे सेकी? सचहे उल्टाके झुठमे डा.उपाधि पवुइया ? जुट्टक मालासे बधाई डेना चाहटै जनता ! ढुरमाटीम मिलैना इनाम डेना चाहटै जनता! जैसिके पुलिस व प्रशासनके संरक्षणमे जान जानके, कर्फू लग्वाके, उ डा. उपाधि पवुइया सरकारकेमे आगि लगैना चाहटै जनता ! टाेरफाेर कर्ना चाहटै जनता ! इज्जट लुट्ना चाहटै जनता ! बर्बर व निरङ्कुश सरकारके छाटि चिरना चाहटै जनता ! सुरक्षा निकायके भुमिका बिषयमे सिखैना चाहटै जनता ! घुसपैठ व ज्यादतिमे  मुकदर्शक हुइल, सरकारक मुह बवैना चाहटै जनता ! टबेमार  नस्लबादीन सुनाे ! अवसरवादीन सुनाे ! २०७४ मंसिर २९ गते देउवा प्रधानमन्त्रीहे बुझाइल प्रतिवेदन, २०७४ पुस १३ गते प्रधानमन्त्री कार्यालयमे बुझाइल प्रतिवेदन काहे आजसम गोप्य बा ? काहे की यी लाल प्रतिवेदन सरकारके बारेमे गम्भीर आरोप लगाइल बा, १८ महिनक बँच्चहे पुलिसनके गोलि लागल कहट, कर्फू लगाके  पुलिस व प्रशासनके संरक्षणमे थारुनके घरम लागि लगाइल कहट, चेलिनके इज्जट लुटगिल कहट, अपराधिनहे नै पकरके जान जानके अपन जिम्मा नै निभाइल प्रशासन अधिकृतहे कार्बाही करे कहट, रेशम चाैधरी लगायट राजबन्दिन घटना क्षेत्रमे नै रहल डेखाइट। दाेषी सरकारहे डेखाइट ? दाेषि पुलिस व प्रशासनहे डेखाइट ? अट्रा बुझ्टी-बुझ्टी बेबुझ सरकार ? डेख्टी जा ! यी चुनावमे टाेर पट्टा काट डेब, टुहि ढुरमाटिम मिला डेब, काहे की हमार बाेटसे टै कुर्सी पैले, टाेर कुर्सी ढला डेब। पावर वरा डेब। चिम्टा कमन्डल लेले भिखारी बना डेब। काखरे की टाेर खैना व डेखैना डाँट सबजे चिहिन रख्लै, लिम्बुवान से लेके खम्बुवान, थारुवान, नेवा, हाे ! आब टाेर खैरियट नै हाे ।