प्रनव आकाशके ६ गजल 

प्रनव आकाशके ६ गजल 

५० दिन अगाडि

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१२ जेठ २०८१

जुडीसितोल हे सिरुवा पावन

जुडीसितोल हे सिरुवा पावन

९० दिन अगाडि

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२ वैशाख २०८१

पृष्ठभूमिः बिक्रम सम्बत साल अनुसार वैसाख १ गते लया बछर (नयाँ वर्ष) सुरु हेछै । कोचिला थारु समुदायमे यीटा दिन बिषेश रुपसे मनछै । छोटना के मुडी मे पानी द्याके आशिर्वाद देछै, जनत बोडनाके गोडा मे पानी द्याके आशिर्वाद लेवेके चलन छै । नव विवाहित जोडी सिरमोर फुल जित लदी पोखरमे जल प्रवाह करछै । सिरुवाके बारेमे बहुते झनाके जानकारी नय हवे साकछै । सेहास सिरुवा के बिषयमे यीटा लेखमे जानकारी देवेलगिन प्रयास करनिस ।  सिरुवा पावन थारु समुदायके संस्कृति छेकै । बछरके अन्तिम चैत महिनामे बहरजत्रा पुजा करछै । ग्रामतीमे गोटे बछर भोगल रोगबियाद, दुखसांघ, पीडाकष्ट सवना बहिके जो हे लया बछर मे फरे यीना रोग, दुःख, पीडा घुमी नय आवियान कहिके डिहवारनी, ग्रामथान, संसारीमाय, मलङ, कुलदेवता, पाँचोदेवीके सुमरीके धामी तान्त्रिक विधिसे चलान करिके बही देछै । वेहा दिन से आपन कुलदेवता, ग्रामथान, डिहवारनी के तीन दिन धुपदिप से सांझवाती द्याके यीटा बछरके बिदाई हे लया बछरके स्वागत करेके चलन छै । बहरजत्रा पुजाके वाद सामुहिक रुपमे कुप, इनार, डगरबाट सफा करैक । वहिने चैतके रानल वैसाखमे ख्याके चलन छै । वैसाख १ गते कादमाटी से लेढीपेढीके भौजी, गोतिया, ननद संगे हँसिमजाक करिके मनवैक । वैसाख १ गते राजाके (थानके राजा, देशके राजा) घरमे जुडीसितोल मनावैक । तकरबाद वैसाख २ गते आम मलवैया आपन घरमे जुडीसितोल मनावैक । अखने वैसाख १ गते जुडीसितोल मनावेके चलन यलैस । जुडीसितोल मनावेके विधिः थारु समुदायमे कुलदेवता के बासस्थान के सिरापाट कहछै । सिरा के अर्थ शिरस्थ (मूल) पाट के अर्थ बास हेछै । कुलदेवता बासस्थान के भनसी घर या गहवर कहछै । कुलदेवताके भनसी घरके इसानकोण मे स्थापना करछै । थारु समुदाय मे कहवी छै ‘सिरा न पाट के गोड लाग टाट के’ कहेके मतलव आपन कुलदेवता के सफामन से पुकार करला से बहुतो बिघ्नबाधा आप्सेआप सामाधान हेल बहुतो प्रमाण छै । बछरके सुरुमे घरके शिरस्थ कुलदेवताके शुद्ध लज, फुलपती, धुपदिप अर्पण करिके आशिर्वाद लेछै । आपन आपन कुलके देवी देवता फरक फरक हवे साकछै ।  तकरबाद ग्रामथान मे स्थापित दरदेवता, धामी धमियेन, हातीबन्धा (गणेश जी), बघेसरी (भवानी जी), लक्ष्मीडारी, अघोरीनाथ, डिहडिहवारनी (बास्तु), संसारी के लजफुल ढारीके आशिर्वाद लेछै । यकरवाद ग्रामतिके बयोबृद्ध या गछदार, गुरुवा धामीके पइर (गोडा) मे जलफुल ढारीके आशिर्वाद लेछै । तव घरके बयोबृद्ध, मातापिता, ककाककी, ददाभौजी के गोडामे जलढारीके आशिर्वाद लेछै । वहिने आपन से छुमीनाके मुडीमे जल द्याके जुडीसितोल कहिके आशिर्वाद देछै । जुडीसितोल हे सिरुवा के अर्थः जुडी के अर्थ जुड (ठण्डा) सितोल के अर्थ सितल (शान्ति) हेछै । बैसाख मे गर्मी धमकल रहछै सेहास जुड (जुर) पानी से मन सितल (शान्ति) हेछै । सेहास बितल बछरके पिडासे दुखित हेल मन हे गर्मीसे तमसल मनके जुडावे लगिन सितल, जुड जल ढारीके कञ्चन शरीर रहोक कहिके आशिर्वाद देवेलेवे कारण जुडीसितोल कहछै ।   बहरजत्रा पुजाके बाद लया बछरमे रोगबियाद, हैजा, फौती, दुःख कष्ट नय भोगे परोक । सुख, शान्ति, निकेकुसले कञ्चन शरीर रहोक कहिके बछरके सुरुमे (सवसे पहिना) आपन कुलदेवताके सिरापाट, ग्रामथान, मातापिता, गुरुवा, धामीके सुरुमे जलफुल ढारकरिके सिरासे आशिर्वाद लेवेके कारणसे सिरुवा कहल गेलैस ।  राजधामी गुरुवा बैसाख १ गते पाँचोदेवती (पंचहायान) हांसपोसामे के पहिना पुजा करछै। तकरबाद इटहरीमे बैसाख २ गते उतर दिसर सिरामे कचना महादेवके जाग्राम पुजा किर्तन करछै । सिरा उतरमे बैसाख ३ गते इटहरीके कचना महादेवके पुजा करलके बाद भाठी दखिन दिसरके थानमे पुजा ढारते गेलके कारणसे सिरुवा कहछै । अखने बछरके सुरु बैसाख १ गते जुडीसितोल के सिरुवा पावन के रुपमे मान्यता पेलकैस । विहाके सिरमोर (फुल) बिसर्जनः नव विवाहित जोडीके सिरमोर (फुल) विवाह के वाद जतनसे सांठीके राखछै । सिरमोरसे झरल फुलनाके समटिके जतन करे परछै । तव बैसाख १ वा २ गते जित लदी या पोखर मे बिसर्जन करे परछै । फुल बिसर्जन के बाद विवाहित जोडी पानी मे हथरीके घुङघरी, झुना, माछ या कुन चिज पहिना पकडछि कि खाली हाथ रहछै, उटासे वकर छौडा कि छौडी बच्चाके जलम अनुमान जोखना कहिके जनबिश्वास छै । झुना भटेलासे छौंडी बच्चा, घुङघरी भेटलासे छौडा बच्चा हवेके प्रवल संभावना रहछै । तकरबाद जलकुमारीके धुपदिप हे फुलघोडा चढछै । जलकुमारी से सुखमय बैबाहिक जीवन हे सन्तान के कामना करछै ।  सिरापाट (कुलदेवता) मे अर्पण विधिः आपन आपन कुलदेवता के जुडीसितोल या सिरुवामे बिशेष करिके पवित्र मनसे गोचर बिन्ति करछै । कुलदेवताके आपन पाट (स्थान) मे आसन बान्हीके बैठे लगिन गोचर बिन्ति करछै । कुलदेवता फरक फरक हेछै । मुख्य रुपमे शिवपार्वती, गयाँ (गांगो), देवी भवानी (बघेसरी), काली, बामत, गहिल, लक्ष्मी (भण्डारनी), बिसहरा (नाग), मुलदुवारमे (प्रवेशद्वार) रक्षा करेलगिन देवीके बाहान सिंह दुनु काते रहछै सेहास सिंहदुवार अपभ्रमसमे सिदुवार बोलचालमे कहछै । बहारसे नकारात्मक शक्ति घर येङनमे प्रवेशमे रोक लगावे लगिन सिदुवारीमे नरसिंह, हलुमान ठाकुर, भैरव के स्थापना करल रहछै ।  हाथगोड धोवीके एकलोटा जल भोरिके, फुलपती, धुपदिप हे पान प्रसाद चढ्याके कल जोडिके कुलदेवतासे बिन्ति गोचर अनुरोध करछै, ‘हे कुलदेवता, हे पांचोदेवी, राजा राज छोडने राज नय भेटछै देवता पाट छोडने से पाट नय रहछै । सेहास आपन राजपाट समारीके स्थीर बरिके बैठ । हमर घरगैरना, बालगोपाल, सखासग्तउन के निके कुसले राखियान । हमे मलवैया छेकिन । येंठ खेछिन झुठ बोलछिन । घडीघडी अपराध करछीन । जे जानछुन वतन्या करछुन । जे जुरलु से चढनुस । जे नय जानछुन से नय चढनुस । अधना अज्ञानी जानीके हमर गलती क्षमा करिदिहेन । तोर शरणागत छुन दया कर, दया कर, दया कर ।’ कुल देवता कि जय, पाँचोदेवती कि जय । यतन्या बिन्ति करिके लोटाके जल ढारी देछै हे गोड लागछै ।                                                                                                 लेखक रामसागर चौधरी उपसंहारः सिरुवा थारु समुदायके सांस्कृतिक धरोहर छेकी । यकर महत्व हे फाईदाके बारेमे छलफल बहस चलना जरुरी छि । थारु समुदाय सिरुवा पावनके जीवन्त राखेलगिन हर प्रयतन करोक । सिरुवा पावनमे गुलगुलिया, पुव, करिबरी, चितकोव रोटी, खिर, सोहारी औठ रकमके पकवान के मजा लिहेन । लया बछर मे बिकृतिके रुपमे प्रवेश करल जाँड, दारू मे फजुल खर्च कम करिके झैझगडासे दुर रहिके आनन्दसे मनावम । कञ्चन शरीर हे प्रफुल मन बनोक सिरुवाके हार्दिक शुभकामना । इटहरी–१२, खनार, सुनसरी

शनिश्रा महत्तमः स्वस्थ्यकर्मीसे लेके समाजसेवीसम् 

शनिश्रा महत्तमः स्वस्थ्यकर्मीसे लेके समाजसेवीसम् 

१०९ दिन अगाडि

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१३ चैत २०८०

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’ मनैन्के च्वाला एक ताल जरम पैलसे मुख जैना प्राणी हो । ओहमार मानुखके जरम पाख हम्र इ धर्तीम कुछ कर परठ । आपन बाँचल संस्कृति, सभ्यता, मूल्य, मान्यता, रहनसहन, परम्परा आदि विविध पक्षह उजागर कर्ना, संरक्षण कर्ना, पुस्तान्तरण कर्ना बहुट जरुरी रहठ । थारु कला, संस्कृति, सभ्यताके संरक्षणके लाग अहोरात्र खट्ना सकारात्मक सोचके धनी रलह शनिश्रा महत्तम । दुःखके बाट उहाँ आब इ दुनियामसे बिदा हो सेक्ल ।  वि.स. २०१२ साल असार १ गतेक दिन जन्मलक महतम वि.स. २०३७ सालम एसएलसी उत्तीर्ण कर्ल । भागीराम थारु ओ सनिसरा महतम जो सुर्खेतसे सबसे पैल्ह एसएलसी पास करुइया थारु समुदायक शैक्षिक अगुवा हुइट । आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, शैक्षिक अवस्थाम बहुट पाछ परल थारु समुदायम असिख शिक्षा क्षेत्रम पह्र परठ कना मोडेल बन्लक महतम प्राविधिक शिक्षा सिएमए पहर्ख स्वास्थ्यकर्मीके रुपम जागिर ओहर लग्ल ।  पैल्हक समयम थारु समुदाय आपन छाइछावन् पह्रैनासे फेन काम ओहर अग्रसर करैना प्रवृत्ति रलहिन् । ऊ ब्यालाम बहुट कम मनै स्कुल जाइट । असिन ब्याला एकठो नमुनाके रुपमा आघ बर्हलक महत्तम करिब २५ बरससम जागि¥या जिन्गि पाछ निवृत्त होखन एकठो सक्रिय सामाजिक अभियन्ताके रुपम अग्रसर अगुवाई कर्टि सुर्खेती थारु समुदायह आघ बहै्रल । शनिश्रा महतम सुर्खेतके थारु इतिहासके एकठो बल्गर योद्धा रलह ।  जागिरके क्रमम थारु बस्ती रहल जिल्ला कञ्चनपुरसे दाङ जिल्लासम स्वास्थ्य क्षेत्रम ढेर समयसम सेवा कर्लक महतम आफन थारु भाषा, साहित्य, संस्कृतिके चिन्तन मनन करट ।  वि.स.२०६१ सालम थारु कल्याणकारिणी सभाके शाखा स्थापना सुर्खेतम हुइल । टब उहाँ जागिरके सिलसिलाम सुर्खेतके छिन्छुम रलह । ओहब्याला सुर्खेतसे थारु कल्याणकारिणी सभाके सबसे पैल्ह आजीवन सदस्यफे बन्ल । थारु कल्याणकारिणी सभाके मेरमेरिक कार्यक्रमम बेला बेलाम सहभागी होखन मैगर सल्लाह ओ सहयोग कर्टि अइल ।  वि.स. २०६५ साल पाछ आफन जागिर्या जीवनम करल स्वास्थ्य क्षेत्रके अनुभव, ज्ञान ओ सिपह सदुपयोग कर्टि थारु बस्ती रहल वीरेन्द्रनगर नगरपालिकाके वडा नं १० स्थित पुरान घुस्राके चोकमा मेडिकल खोल्क कुछ समय ब्यतित कर्ल । आफन समुदायम बहुत सेवामुखी ढङ्गले निस्वार्थी रुपम सेवा कर्ल । वाकर पाछ मेडिकलके जिम्मेवारी आफन छाइ, डमन्डवाह जिम्मा लगाख निरन्तर सामाजिक, सांस्कृतिक अभियानमा आघ बहर्ल । जीवनके उत्तरार्धम थारु समुदायके भासा, कला, साहित्य, मूल्य, मान्यता, रहनसहन, संस्कृतिह कसिक बचैना कना सोचले निरन्तर समाजम घुलमिल हुइ लग्ल ।  जीवन निरन्तर बहटी रना लड्या हो । जिन्गीम उभरखाभर चल्टी रहठ । भविष्य सुग्घर हुइक लाग वर्तमान जिटी हुइ परठ । उहाँ जियटसम थारु लोक कला, संस्कृति, सभ्यता बचाइक लाक समाजम फुट्ख नाहि, जुट्ख जाइ परठ कना भावना रलहिन् । ओहमार उहाँ थारु कल्याणकारिणी सभा सुर्खेतके आयोजित बैठक, भेला कार्यक्रमम सहभागी हुइना, रचनात्मक सुझाव सल्लाह डेना करठ ।  वास्टवम धन रलक किल सम्पन्नता निहो, जुन चिज रैख फेन उपयोग ओ उपलब्धि निहो ऊ धन रैख फे नि रहल बराबर हो कना भावानात्मक उच्च विचार रलक महतम सुर्खेतके ढुरखम्बा रलह । वि.स. २०७६ सालम थारु लोकलयम रलक गीत रस रस साली हमार... कना गीतके बोलम बुदबुदीम सुटिङ हुइटी रह । उ गीतके सुटिङके आतिथ्यताम आमन्त्रित शनिश्रा महतम कार्यक्रमम जो आर्थिक सहयोग कर्ना बचन डेल । उ बाटले कलाकारिनके हौसला बहर्लिन् । उहाँ रस रस साली हमार...गीतके निर्माता बन्ल ।  उहाँ बहुट इमानदार, सहयोगी, सहृदयी, निष्कपट, निस्वार्थी भावनाके व्यक्ति रलह, ओहमार कहल वचन जैह्या पूरा करट । थारु कल्याणकारिणी सभासे आयोजित मेरमेरिक कार्यक्रमके योजना, परिकल्पना कर्ना, नैतिक, भौतिक एवम् समय समयम आर्थिकसमेत सहयोग कैख थारुनके सामाजिक, सांस्कृतिक पक्षह आघ बह्राइ परठ, दस्तावेजीकरण कर परठ कैख सुर्खेतके अगुवा बुद्धिजीवीन हौसैना, कामले काम सिखाइट कहसक कर्टि जाइ सिख्टि जाइ कना उहाँक भावना रलहिन् ।  यह क्रमम वि.स. २०७७ सालके पाँच्वा थारु साहित्य राष्ट्रिय सम्मेलन सुर्खेत, सुनसरी या काठमाडौँ कर्ना कैख व्यापक बहस चलल रह । इ बाट स्वयम् पंक्तिकार महतम जीह सुनैटि कि सुर्खेत कर्ना निर्णय कराउ कल । सुर्खेत जिल्लाह राष्ट्रव्यापी रुपम थारुनके रस्टीबस्टी बा कैख चिन्हाइ पर्ना बा, सुर्खेती पहिचान देखाइ पर्ना बा । यकर लाग जसिन सहयोग फे कर्ना कैख उहाँ वचन डेल रलह । उहाँके साथ समर्थन ओ सहयोगम सुर्खेतम पाँच्वा थारु साहित्य राष्ट्रिय सम्मेलन फे कैगिल । जुन सुर्खेतके लाग ऐतिहासिक काम रह । उ सम्मेलन सफल हुइनाम उहाँक् बहुट बरा योगदान बाटिन् ।  कभुकाल नि स्वाचल शब्दले केक्रो मन जिटट् ट कभु ओह मन फे टुक्रा टुक्रा हुइट कहसक पाँच्वा थारु साहित्य राष्ट्रिय सम्मेलन पाछ थाकस सुर्खेतसे कुछ खटपट फे हुइल । सम्मेलन पाछ कुछ आर्थिक रकम बचाख थारु जर्नल प्रकाशन कर्ना योजना स्वयम् इ पंक्तिकार ओ समाजसेवी शनिश्रा महतमके रह । तर, थाकसके कुछ पदाधिकारीन उ योजना मन नि पर्लक कारन खटनपटनले उहाँक संरक्षकत्वम लौव संस्था लखागिन थारु उत्थान मञ्च जन्मल ओ वि.स. २०७८ सालम खोजमूलक थारु जर्नल लखागिन प्रकाशन हुइल ।  लखागिन जर्नल प्रकाशन कर्नाम फे महतमके बरा भारी योगदान बाटिन् । उहाँ जर्नल प्रकाशन करक लाग गाउँ गाउँम लेख रचना संकलनठेसे लौव युवा पुस्ताके लर्कन आफन थारु भासा, कला, साहित्य, संस्कृतिके ज्ञान गरिमाके व्याख्या विमर्श करठ । लखागिन जर्नल प्रकाशन कर्नाम फे महतमके बरा भारी योगदान बाटिन् । उहाँ जर्नल प्रकाशन करक लाग गाउँ गाउँम लेख रचना संकलनठेसे लौव युवा पुस्ताके लर्कन आफन थारु भासा, कला, साहित्य, संस्कृतिके ज्ञान गरिमाके व्याख्या विमर्श करठ । उहाँ जुन जुन गाउँम जाइठ, उ गाउँम घन्टौसम बहस करट । बुह्रापाका, युवा, महिला, सबजन भावनात्मक रुपम लग्लसे केल सामाजिक, सांस्कृतिक एकता हुइना ओ हमार कला संस्कृति बच्ना उहाँक् विचार रलहिन् ।  थारु समुदायके ऐतिहासिक सख्या नाच आब गाउँ गाउँसे लोप हुइटि बा । थारुनके मौलिक पहिचान ब्वाकल संस्कृति कसिक बचैना हो कना बहुट चिन्ता ओ चासो करट । विभिन्न बैठक, सभा सम्मेलनम सख्या नाचके गीत, नाच ओ पैयाके संरक्षण झट्टहे कर परल कैख थारु बुद्धिजीवी, कलाकार हुकहन दबाब डेहट । सख्या हमार पहिचान हो, इतिहास हो, हमार पुर्खनके सहिदान हो, ओहमार यकर लाग सक्कु लगानी कर्ना कार्यपत्रसहित थारु कल्याणकारिणी सभाके बैठकम एक लाख रुप्या फे डेल रलह ।  उहाँ एकदमै खरो स्वभावके रलह । उहाँक उ रुप्या प्राप्त पाछ सख्या नाच डकुमेन्ट्री निर्मानके व्यापक छलफल हुइल । उहाँक पेश करल कार्यपत्र सख्या नाच निर्माणके निर्देशन, सम्पादन, लेखन सम्पूर्ण कार्य सुर्खेतके विश्वासिलो संस्कृतिविद मानबहादुर पन्नाह अप्नेहे टोक्ल रलह । ओहअनुसार करिब दुई महिनासम व्यापक छलफल हुुइल, विचार विमर्श हुइल । अन्ततः सख्या नाच निर्मानम लग्ली । ऊ ब्याला उहाँ रातदिन घामपानी नाकैख बहुत खट्ल । मै पंक्तिकार स्वयम् ओ उहाँ जोडी गोचाली बनल रलही । हरेक गाउँबस्तीम उहाँसे डगुर्लि । करिब ८० जहनसे ज्यादा कलाकार, बुद्धिजीवी, सरोकारवालाबिच पटक पटक छलफल प्रशिक्षण पाछ करिब दुई अठजार गीत गैना दिदीबाबुन अभ्यास करैली, वाकरपाछ रेकर्ड कर्ली ।  उह क्रमम सख्या नाचसम्बन्धी एक अठवार जटि वीनपा–२ खोलिगाउँम कलाकार ओ मन्डरेन प्रशिक्षण ओ तालिम डेलि । काम दु्रतगतिम आघ बह्रैना कामम डट्ख लग्लि । २०७८ कुँवार २५ मा खोलिगाउँम सुटिङके उद्घाटन कैख छायाङ्कन कर्ना योजनामुताविक काम आघ बह्रल । इ विषयम थाकस सुर्खेत सख्या नाच निर्मानके टिमह जुन सहयोगी भूमिका निर्वाह कर पर्ना रह उ नि करल । ओह फे अन्य सुर्खेती बुद्धिजीवी कलाकार हुकहनके सहयोगले करिब ६ महिना पाछ सख्या डकुमेन्ट्री निर्मान हुइल । उहाँ निर्माणम लग्लक अपुग थप रकमके व्यवस्था कैख पूरा कर्ल । असिख सख्या नाच डकुमेन्ट्री निर्माण २०७८ म पूरा हुइल तर यकर सार्वजनिक कर्ना काम २०८० कार्तिक २५ गते एक कार्यक्रमबिच कैगिल जुन कार्यक्रमम सुर्खेतके प्राज्ञिक, दिग्गज व्यक्तित्व डा.महेन्द्रकुमार मल्ल, वरिष्ठ अधिवक्ता धु्रव कुमार श्रेष्ठ हुकहनसे रिलिज करली । अन्य जिल्लासे निर्मान हुइल सख्या नाच डकुमेन्ट्री अनौपचारिक किल डेख्जाइठ । हाल सुर्खेतसे बनल सख्या नाच गीत निर्माण विधि विधानअनुसार मौलिक पहिचान झल्कना निर्मान कर्लक ओहर्से यकर गरिमा महत्व बहुट ढेर बा ।  हरेक मनैन्के चासो ओ ज्ञानके क्षेत्र फरक रहठ । संसारम मनैन्के ड्याखल ओ भ्वागल अनुभूति फे फरक रहठ । शनिश्रा महतम आफन जन्मल, हुर्कल ठाउँ, बाँचल संस्कृति, संस्कार गीतबास मजासे अनुभूत कर्ल रलह । ओहमार उहाँ लौव युवा पुस्तन इ बाट बुझाइ पर्ना महसुस करठ । हरेक दिन औपचारिक एवम् अनौपचारिक भेटघाट छलफलम थारु कला संस्कृतिके संरक्षण, सामाजिक जागरण कसिक लन्ना कना चिन्ता ओ चासो किल नाहि कामम अग्रसर होखन सँग सँग नेङ्ना, हौसला डेना, चाहे जौन ठाउँके कार्यक्रमम पुग्ना करठ ।  उहाँ राष्ट्रिय थारु कलाकारके टिमह, थारु कल्याणकारिणी सभाके अगुवा हुकहन पद किल ओगर्ख बेठ्ठो काम फे करो कैख अर्जि करठ । उहाँ राष्ट्रिय थारु कलाकारके टिमह, थारु कल्याणकारिणी सभाके अगुवा हुकहन पद किल ओगर्ख बेठ्ठो काम फे करो कैख अर्जि करठ । हम्र थारु पछुगर्लक कारन एकापसम ग्वारा कट्ना प्रवृत्तिले हो, आब पह्रल लिखल समाज बन्टी बा, ओहमार एकजुट हुइना सन्देश डिहट । प्रतिभाशाली व्यक्ति कुछ कर्ना सोचले प्रेरित हुइठ न कि और जहनसे हट्ना या जिट्ना । वास्तवम मनैन्के सोच, व्यवहार, विचार ओ कामले महान हुइना हो । महतम ज्या बोल्ना उ काम पूरा कर्ना इमानदार योद्धा रलह । उहाँक न कुहिनसे जिट्ना लक्ष्य रलहिन् ना ट कुहिनसे हट्ना लक्ष्य रलहिन्, रलहिन् ट केबल सामाजिक, सांस्कृतिक उत्थान कर्ना, आफन लोक कला संस्कृति बचैना ।  थारु समुदायम मौलिक मन्द्रा बजैना युवा पुस्ताके कमि हर जिल्लाम बा । ओसहख सुर्खेत जिल्लाम फेन लौव पुस्ताके युवा हुक्र मन्द्रा बजैना सिप नि हुइन् । हमार पुर्खा ओरैटि जैना कला संस्कृति हेरटि जैना प्रवृत्ति बहर्टी बा । यकरलाग कुछ ट कर परल कैख उहाँ सरसल्लाहम मन्द्रा बजैना तालिम २०८० वैशाख २१ ठेसे  जेठ १ गतेसम १० डिन्या तालिमके व्यवस्था प्रदेश सरकारके सहयोगम आयोजना कैगिल । गाउँ गाउँसे मन्द्रा बजैना युवा खोज्ली, मुस्किलसे १५ जहन मन्दर्या १५ जहन नचन्या बाबुन सिखैली । इ कामम फे उहाँके अग्रसरताम सम्पन्न कर्लि । थारु वर्गभिट्टर फे मेरमेरिक थर उपथर बा । आफन आफन गोत्र थरके बारेम चासो ओ सरोकार ढैना स्वभाविक बात हो । उहाँ दहित थर भिट्टरके थारु हुइलक कारन सुर्खेती दहित थारु गोट्यार भेला, सभा सम्मेलन, तथ्याङ्क संकलनम फेन बहुट काम कर्ल बाट उहाँ । सुर्खेतम दहितोन जगैना कामम फेन उहाँ अहोरात्र खट्ल । एकठो घर बनाइ ब्याला कैयोठो सर्ज ईंट्टा फ्वार परठ । फ्वारल ईट्टाले फेन घर निर्मान हुइट, ओसहख फुटल थारुन जोर्ख सिङ्गो समाज बनैना बा कना उहाँ विचार सोचह लौव पुस्ता सिख पर्ना बा ।   सुर्खेतम माघ महोत्सव मनैना सुरुवात सबसे पैल्ह २०६१ सालम इ पंक्तिकारके अग्रसरताम कैगिल रह । हरेक बरस गाउँम किल मनैना माघ महोत्सव कार्यक्रम इ २०८० सालम माघ महोत्सव वीरेन्द्रनगरके खुला मञ्चके प्राङ्गणम कैगिल । करिब २५ गाउँक मनैनके हजारौँ हजार सङ्ख्याके उपस्थितिले इ कार्यक्रम ऐतिहासिक बन पुगल । यकर श्रेय शनिश्रा महतम जो हुइट । कार्यक्रमके लाग उहाँक खटाइ डेख्ख मै चित पर्नु । बिमार मनै फे हरदिन युवा लर्कन खरखेटन गाउँ गाउँम प्रचारप्रसार कर्ल । मै विश्रामके लाग अनुरोध कर्नु तर उहाँ मै टुहिन अन्तिम सास रहठसम साथ डिहम कैख घर बैठ नि चहल । हरेक काम सफल बनैनाम उहाँ बोली ओ व्यवहार डेखाइट । जुन हम्र अगुवाई कर्ना मनै सिख पर्ना बाट हो ।  उहाँक सपना अन्सार सुर्खेतम थारु सङ्ग्रहालयके भवन कालिमाटी गाउँम निर्मान हुइल बा । इहिह सबजन मिल्ख सजाइक लाग छलफल कैख एकजुट होखन जैना धारना कैयो बेर सार्वजनिक रुपम कचहरी बैठक उठान कर्ल बाट । उहाँक डुसर सपना थारु भासा मु जाइटा यकर दस्तावेजीकरन कर्ना नियमित थारु जर्नल पोष्टा निकर्ना ओ थारु पुस्तकालय निर्माण कर्ना जोड रलहिन् । ओहमार थारु पुस्तकालयके लाग २०७७ साल सुर्खेतम आयोजना हुइलक पाँचौ थारु साहित्य राष्ट्रिय सम्मेलनके पुस्तक प्रदर्शनीम विभिन्न जिल्लासे प्रकाशित थारु पुस्तक करिब १० हजारके पुस्तक खरिद कैख थारु कल्याणकरिणी सभाह पुस्तकालयके लाग डेल बाट ।  उहाँक् टिसर सपना रलहिन् गाउँघरम लोप हुइटि रलक कला संस्कृति जगेर्ना कैख दस्तावेजीकरण कर्ना । आफन गाउँ ठाउँम पुरान पुर्खनके बेल्सल भासाम थारु गाउँके चोकके नामाकरन कर्ना । इ कामम फे सुरुवात आफन गाउँके सुरु कैसेक्ल बाट । उहाँ यह माघक बखेरीम गाउँम जैना डग्रिम मटाँवा चोक नामाकरन कैख साइनबोर्ड गार लगा सेक्ल । ओसहख आफन ख्यालल हुर्कल खोल्ह्वा, लड्या, बन्वाके नाउँ फे थारुनके ढरल अनुसर बेल्सना ओ घर परिवार एकापसम थारु भासाम ब्वाल पर्ना आग्रह रलहिन् ।                                                                                                                                                                लेखक मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’ थारु पन, थारु मन थारु धनके एकीकृत कैख एकजुट हुइना कना उहाँक विचार रलहिन् ओहमार थारु समुदायम स्थापित सहकारीके एकीकरनके लाग फेन रातदिन डौर्ल । एकठो बल्गर सहकारी बनाख थारुन्के आर्थिक स्तरोन्नति कर्ना उहाँक सपना पूरा कर्ना बाँकी बा ।  अन्ततः उहाँ यी भौतिक संसार छोर्क हमहनसे बिदा हो सेक्ल । बट्ठाके तौल नप्ना पलरा फे नि रहठ । हरेक मनैन् आफन पीडा गम्हीर लागठ । आब उहाँक निधनले घरपरिवार लगायत सारा सुर्खेती थारु समुदाय एवम् शुभचिन्तक बट्ठाम बा । आब हमारठे उहाँक डेखाइल विचार, सोच ओ सपना पूरा कर्ना जिम्मेवारी आइल बा । उहाँक डेखाइल डगर ओ सपना पूरा कर सेक्लसे केल उहाँप्रति सच्चा श्रद्धाञ्जली हुइ । हम्र हमार भासा, कला, साहित्य, संस्कृति, सभ्यताके संरक्षण करक लाग मनमुटाव हटाख एक्क ठाउँम ठह्रैना जरुरी बा । हम्र आफन आफन ठाउँसे आफन समाज संस्कृतिके लाग कुछ न कुछ काम कर्बि, योगदान कर्बि कलसे किल उहाँप्रति सच्चा सम्मान हुइ सेकि ।    

मोर होरि

मोर होरि

११० दिन अगाडि

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१२ चैत २०८०

पुराक मै छोटु रन्हु टे हमार घर खुब आइट होरि खेलुइया गाउक व रानपरोसक लवन्डा लवन्डि होरि ढुरर्हेरि ख्याल गिट गैटि सेम्रक ढ्वाटाँ फुल्गेरे फुल्गेर उप्पर लागल टेँम्हरि, भेरि बहन्ना घारिम  बठन्याँवन हेरो बारि म घन्टन घन्टन घन्टा बाज ओसहेक मोर मन बाझ पिप्रिक पोक्या झार्क मै रुइठु डिया बार्क अरि बठिन्या हुर कैइड्या...हुर कैइड्या बसन्या मुर्गा अट्वम  ढुरहेरि खेल्ना घट्वम होरि होरि, आँख बिडोरि अस्टे अस्टे टमाम मेरिक गिट गइटि आइट् महि फे खुब रहर लाग हुकन्हेक सँग होरि खेल्ना ढुरर्हेरि खेल्ना हमार घर दिदिहुक्रे रलह हम्रे पाँच दिदी बहिन्या मै सबसे छोटु डाइक दूध पोछ्नि छाइ डुइठो दिदीन्के भ्वाँज हुइल रल्हिन डुइठो दिदिन्के बाम्कि रहे भ्वाज कैना डुइ दिदिन्के पाछ मोर पाल्या  मै सबसे छोटु हुइलक मारे महि सबजे मैया करट बहुट् मैयाँ करट भुन्टि भुन्टि कहँट मै सक्कुन्क मैयाले पुलपुलाइल रहु महि क्वारम लेलेख नाच टल्है किउ गैना किउ नच्ना किउ रंग अबिर घस्ना मैफे नाचटहु दिदिहुक्रफे नाच टल्ह खुब राहरंगि हुइटह सन्झ्याफे हो स्याकल  गाउँक लर्का लाहलुहुक घर घर आइ टल्है हम्रे भर खेल्टि रहि एकघचिक पाछ हुडहुड पुटपुट होलि रे होलि... कटि  एकहुल रानपरोसक लवन्डावँ अइल रंग अबिर पिचकारि नेँन्ढ नेँन्ढ दिदी हुकन रग्याट भिर्ल  रंग अबिर घसक लाग रगेट्टि रगेट्टि बराडुर सम पुगैल अँन्ढार होगिल रह साट आठ जहनके आघ मोर दिदिक कुछ कर नि स्याकल पापिन्हँक पाप मन रल्हिन रगेट रगेट रंग अबिर घस्ना निहुँम म्वार दिदिक इज्जट लुट्ल हम्र दिदिह राटभर खोज्लि कहु फे नि भेट्लि आढा राट टरग्यान रन्ल्हा खबर करल गिरि डर्वाँ बेल्झुन्डिम रख्नाहान बठिन्या गरझुलल बाट कैख ना कटि दिदी गरझुल्क बिट्गिलि उ डिनसे मोर मनमे मोर नजरमे होरिके रंग अबिर व होरि खेल्ना बरा डुखके बाट हुइल हरेक बरस होरि,ढुरर्हेरि आइट टो मै सम्झठु होरिक डिन  गुमाइ परल आपन दिदिहे  उ डिन होरि या ढुरर्हेरि नै आइल रहट टो  मोर दिदिक ओसिन घटना घट्ने नाइ रह उहेक मार होरि या ढुरर्हेरि मोर लाग अभिसाब बनल बा डुरघट्ना बनल बा लाल पियर हरड्यार रंग अबिर डेख्नु कलसे  महि आपन दिदिक याड आइट ओ उह डिनके झलझलि सम्झना  आँखिक आघ घुम लागट । घुम लागट ।।                                                                                                                                                                                         कवि पुराक

मै थारु रुख्वा

मै थारु रुख्वा

३३१ दिन अगाडि

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३२ साउन २०८०

गणेश वर्तमान लिप्स्टिपिक रुख्वा अस् स्वाझ् बाटुँ जिन्नक रुख्वा अस् निख्खार बाटुँ टुँ डुरसे चिन् सेक्लो  मै थारु रुख्वा हुइटुँ। सक्कु ज मैहेँ रोस्ठ सक्कु ज मैहेँ खोस्ठ घरक् खुँटा बनाइक् ला बगर्वक् कोरै बनाइक ला । घरक् खुँटा बनाइबेर किउ कुह्रारिले ठप्काइट् बगर्वक् कोरै बनाइबेर किउ हाँठ्या आरिले ग्याँरट्। टभुन मै चामचिम् पलि रठुँ कट्वा पाइबेर कुह्रार अछिन्के  महि ठप्क नि आइट् पानी नि पाक रुइना  ढन्सुहिअस् चिल्लाइ नि आइट् उह मार,  कैहेनिक् मन्त्री मन्डलम फे  महि काट्के और जाहिन गस्किल । मै भित्र भित्र कठ्याक् रुइनु  उ बाट् म्वार आँख् हन पटा बाटिस् आपन्न सङ्घारि मन रुइबेर डुन्ड्रि अस् आँस् बहाइ नि पैलक् डुख् साइट् मै टेनक् रुख्वा अस् रटुँ ट के ह्यारट् महि ? साइट् मै गुल्ह्रिक रुख्वा अस् रटुँ ट के ड्याखट् महि ? कैहेनि शिक्षा ऐन म फे म्वाँर फेड्रि ठप्कल । म्वार छाहिँ हटिल । टभुन मै ऐया वा फे नि कनु । महि काजे ठप्कलो नि कनु महि गेर्ना हाँठ्हन नि पिट्नु महि ग्याँर कना मुँहन नि ठुक्नु मै लाट् कलसे  जाँर ढोक्क जन्नि गर्याए आइट् मै हाँठ् नि लगिनाहा कलसे आपन जन्निहन ठठाइ आइट् टभुन महि कटुइयनके लाक् लिप्स्टिपिक रुख्वाअस् स्वाझ् बाटुँ जिन्नक रुख्वाअस् निख्खार बाटुँ । मै थारु रुख्वा ।।

फल्कहान छोटका

फल्कहान छोटका

३६२ दिन अगाडि

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२ साउन २०८०

पुस माघके जुर बयाल ओहो ! कत्रा जार हुइल ।  फल्कहान छोट्कवक् छावा डुनु हाँठ छातीम्  मन्के चप्क्वाइल । मुक्त कमैया फल्कहान छोट्कवाहे  छावाहे सुफ्लैना  कौनो जवाफ नै रहिस ।  छावा बाबाहे जार हुइल  सुनैलक अर्थ  डंडुर झुल्वा माँगटा कना  फल्कहान छोट्कवाहे  मजासे पटा बटिस ।  मने का कर्ना  ना टे ओकर कौनो खेतवारी  ना टे कौनो ठेक्का बटिस  कहाइके मतलव ऊ  वेकम्मा बा ।  छावक् जारसँगे ओकर फेन जार बह्रलिस   ऊ कौह्रा टापे छिमेकीक्  खेरन्ह्वाओर नेंगल ।  पिठ खोलल्  झुक्काहस्  अन्य छाँहि फेन  आगि टप्टि रहिट ।  भेभवा, सुख्ला, मंगलवा, पण्डवा  ओकर मुक्त कमैया संघरियन्  मानो ओइने आँखिक् शानले बट्वइटि बटाँ ।  का करी  अढिया खेती कसिक लगैना हो जिमडरवा छाइ कमलह्रिया माँगठ  ना लगाउँ पेट रोटी माँगठ  यी उपरी जार टे  दिन उचियाइटसम कम हो जाई मने पेट भित्तरके जार  इहि कैसिक डंडुर बनैना   फल्कहान छोट्कवक् ठेन  यकर कौनो जवाफ नै हुइस ।  डोसर ढम्मरढुस छाँहि  एक्फाले हाँठ बह्राइठ ओ खोखठ्  “फेन कमैयाँ बैठ्लेसे हो गैल झे ।” फल्कहान छोट्कवक पैला  हेर्टि हेर्टि ओहे छाँहीक्सँगे  हेरा जाइठ ।